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taj mahal agra | ताजमहल ! खूबसूरती का एक नायाब नमूना

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taj mahal agra | ताजमहल !

 

मशहूर शायर शकील बदायूनी का एक शेर है कि –

“एक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताजमहल

सारी दुनिया को मोहब्बत की निशानी दी है”

ताजमहल ! खूबसूरती का एक नायाब नमूना, जो दुनिया में दूसरा नहीं है और ना ही कभी बनाया जा सका। 

ताजमहल (taj mahal), जिसकी पहचान प्यार की अमर निशानी के रूप में है। यह बहुत से शायरों की गजलो का हिस्सा रहा है और बहुत से आशिको की प्रेम कहानियों में शामिल रहा है।

 एक ऐसी खूबसूरत इमारत (taj mahal) जिसने समय की एक लंबी यात्रा की है और आज भी अपने वजूद को उसी खूबसूरती के साथ संभाले हुए हैं, जिस खूबसूरती के साथ इसे बनाया गया था।

 चलिए इतिहास के कुछ जाने पहचाने और कुछ अनछुए पन्नों को पलटते हैं और जानते हैं ताजमहल (taj mahal) के बारे में वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं।

Taj Mahal Agra

ताजमहल की अनसुनी दास्ताँ – taj mahal history

 

where taj mahal is located ?

यमुना नदी के तट पर बसा आगरा शहर ! जिसे अतीत में “अग्रवन” कहा जाता था, फिर “आर्यग्रह” कहा गया, उसके बाद मुगल काल में जिसे “अकबराबाद” कहा गया। और वर्तमान में हम सभी इस शहर को आगरा के नाम से जानते हैं।

आगरा शहर दिल्ली से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसे सिकंदर लोदी ने 1504 में अपनी राजधानी बनाया और इसे पुनः बसाया। 

आगरा की पहचान पूरी दुनिया में जिस वजह से है वह है ताजमहल, जिसे देखने के लिए पूरी दुनिया भर से लोग आगरा आते हैं।

who built taj mahal ?

मुगल बादशाह शाहजहां जो अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल को बेइंतेहा प्यार करता था और उसी प्यार की अमर निशानी के रूप में ताजमहल का निर्माण कराया गया।

जिस मुग़ल बादशाह को सारी दुनिया शाहजहां के नाम से जानती है, असल में उसका बचपन का नाम खुर्रम था। 

यह सभी जानते हैं कि शाहजहां के पिता का नाम जहांगीर था, लेकिन यह जानकर आश्चर्य होगा की शाहजहां की मां जोधपुर के राजा उदय सिंह की पुत्री जगत गोसाई थी और इन्होंने 1592 में लाहौर में शाहजहां को जन्म दिया।

मुमताज महल का असली नाम अर्जुमंद बानो बेगम था।

मुमताज महल की मृत्यु 38 वर्ष की उम्र में हुई थी जब वह अपनी 14वी संतान को जन्म दे रही थी। मुमताज अपनी मृत्यु के समय मध्य प्रदेश के बुरहानपुर शहर में थी।

मृत्यु के बाद मुमताज महल को बुरहानपुर में ही दफना दिया गया था ।

( taj mahal story )

शाहजहां अपनी पत्नी मुमताज को बेइंतेहा प्यार करते थे और इसीलिए उन्होंने अपनी पत्नी की याद में एक बेहद खूबसूरत मकबरा बनाने का निश्चय किया। यहीं से शुरूआत हुई ताजमहल के बनने की।

जब मुमताज महल ने दुनिया को अलविदा कहा तब शाहजहां ने यह तय कर लिया की वह मुमताज के लिए दुनिया का सबसे खूबसूरत मकबरा बनाएंगे और मकबरा बनाने के लिए सही जगह की तलाश शुरू कर दी। उस समय आगरा को अकबराबाद कहा जाता था। शाहजहां को अकबराबाद मुमताज महल के मकबरे के लिए एक बेहतरीन जगह लगी।

एक भव्य और विशाल मकबरा बनाने के लिए आगरा में यमुना नदी के पास जगह तय की गई।

Taj Mahal Yamuna river

मकबरे का स्ट्रक्चर बहुत ही विशाल और भारी होना था इसीलिए इसे सहारा देने के लिए इसकी नींव भी काफी मजबूत बनानी थी। इसलिए यमुना नदी के किनारे के पास जहां ताजमहल बनना था वहां बहुत ही बड़े बड़े विशाल गड्ढे खोदे गए और उनमें लकड़ियां और लट्ठे डाले गए जिससे कि ताजमहल को मजबूती दी जा सके।

यह लकड़ियां कोई सामान्य लकड़ियां नहीं थी, यह आबनूस और महोगनी की लकड़ियां थी जो कि नमी के साथ और भी ज्यादा मजबूत तथा फौलादी हो जाती हैं। यही वजह है कि ताजमहल आज भी उतनी ही मजबूती के साथ खड़ा है जितनी मजबूती के साथ अपने निर्माण के समय खड़ा था।

जिस जगह ताजमहल बनाया गया वह जमीन राजा जय सिंह की थी जो कि राजा मानसिंह के पुत्र थे। उस समय मुगलों में और राजा मानसिंह में संबंध काफी अच्छे थे तो राजा जयसिंह ने इस नेक काम के लिए यह जमीन शाहजहां को मुफ्त देने की पेशकश की।

वेन एडिशन बैगली, जियाउद्दीन, ए देसाई कि किताब Taj Mahal : The illumined Tomb के अनुसार शाहजहां ने मकबरे की जमीन के बदले जय सिंह को एक विशाल हवेली भेंट की थी।

 

ताजमहल के विषय में रोचक जानकारियां, जो आपने पहले कभी नहीं सुनी – Interesting facts about Taj Mahal

 

  • आगरा में ताजमहल लगभग 42 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। 
  • ताजमहल के निर्माण कार्य में तत्कालीन समय में लगभग 32 मिलियन रुपए खर्च हुए थे। अगर आज के समय में इस राशि का आकलन किया जाए तो यह लगभग 52.8 बिलियन रुपए होंगे और अगर इसे यू एस ए डॉलर में देखें तो यह राशि लगभग 827 मिलियन डॉलर होगी।
  • आगरा में स्थित ताजमहल एक बेहद ही आकर्षक कृति है जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग हर रोज यहां आते हैं। आंकड़ों के अनुसार हर साल लगभग 7 से 8 मिलियन लोग आगरा में ताजमहल को देखने के लिए आते हैं।
  •  यूनेस्को ने वर्ष 1983 में ताजमहल को विश्व विरासत का दर्जा दिया था और ताजमहल को मानव निर्मित दुनिया की बेहतरीन कृतियों में शामिल किया था। साथ ही साथ ताजमहल को दुनिया के सात अजूबों में भी शामिल किया गया है। 
  • आपको जानकर आश्चर्य होगा की ज्यादातर टूरिस्ट ताजमहल को सामने से देखते हैं, असल में वह ताजमहल का पिछला हिस्सा है। ताजमहल का जो शाही दरवाजा है वह नदी के किनारे दूसरी तरफ है। 
  • दुनिया का सबसे खूबसूरत मकबरा बनाने के लिए लगभग 6 महीने तक दुनिया भर के बेहतरीन कारीगरों की तलाश की गई। उन कारीगरों में से 37 कारीगरों को ताजमहल के निर्माण के लिए चुना गया और इन 37 कारीगरों के साथ लगभग 20000 मजदूरों ने मिलकर 22 वर्ष की मेहनत के बाद ताजमहल जैसी अनुपम कृति तैयार की। 
  • कुछ इतिहासकारों के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले कारीगरों और मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे। हालांकि कुछ इतिहासकार ऐसा नहीं मानते हैं उनका मानना है कि शाहजहां ने इन मजदूरों को एक मोटी रकम देकर इनसे करारनामा करवाया था कि वह दोबारा इस तरह की कोई भी इमारत नहीं बनाएंगे। 
  • आपने अगर ताजमहल को करीब से देखा होगा तो पाया होगा कि ताजमहल की जो चारों मीनार हैं वह थोड़ी थोड़ी बाहर की ओर झुकी हुई है। और ऐसा गलती से नहीं हुआ है बल्कि इन मीनारों को इसी तरह बनाया गया है क्योंकि कभी अगर भूकंप आए तो मीनारें बाहर की तरफ गिरे जिससे की मुख्य मकबरे को कोई नुकसान ना हो। 
  • tajmahal height – कुतुबमीनार को भारत की सबसे ऊंची मीनार माना जाता है लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ताजमहल की ऊंचाई कुतुब मीनार से भी अधिक है। जहां कुतुबमनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है वही ताजमहल की ऊंचाई 73 मीटर है। 
  • ताजमहल को बनाने में जो पत्थर और बेशकीमती रत्नों का उपयोग हुआ है उन्हें देश और दुनिया के अलग-अलग जगहों से लाया गया था।
  • ताजमहल में इस्तेमाल किए गए सफेद संगमरमर को राजस्थान के मकराना, जेड और क्रिस्टल चीन से, लेपिस लजूली अफगानिस्तान से, टर्कॉइज तिब्बत से, जैस्पर पंजाब, सफायर श्रीलंका से और कार्नेलियन अरब से मंगाया गया था।
  • इस तरह से कुल 28 बेशकीमती रत्नों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों से मंगाया गया था और इन रत्नों को लाने के लिए लगभग 1000 से अधिक हाथियों का इस्तेमाल किया गया था।
  • when taj mahal was built ? – ताजमहल का निर्माण कार्य 1631 में शुरू हुआ था और यह 1653 में पूरा हुआ था। ताजमहल को पूरी तरह से तैयार होने में लगभग 22 वर्ष का समय लगा था और इसके निर्माण कार्य में लगभग 20,000 से अधिक कारीगर और मजदूर लगे थे। 
  • ताजमहल का मुख्य गुंबद लगभग 60 फीट ऊंचा और 80 फीट चौड़ा है जोकि करीब से देखने पर बहुत ही विशालकाय नजर आता है। मुख्य गुंबद पर जो कलश है वह शुरुआत में सोने का हुआ करता था, बाद में इसे बदलकर कांसे का लगा दिया गया। 
  • ताजमहल की नींव बनाते समय उसमें ईट पत्थर के साथ-साथ आबनूस और महोगनी की लकड़ी भी भरी गई थी। यह लकड़ियां नमी के साथ-साथ और भी ज्यादा मजबूत और फौलादी हो जाती है। लकड़ियों को नमी यमुना नदी के पानी से मिलती रहती है।
  • भारतीय लेखक पुरुषोत्तम नागेश ओक ने 1989 में Taj Mahal : the true story के नाम से एक किताब लिखी थी। इस किताब में उन्होंने दावा किया था कि ताजमहल मकबरे से पहले एक शिव मंदिर था और इस मंदिर का नाम तेजो महालय था। पुरुषोत्तम नागेश ओक ने अपनी बात को साबित करने के लिए सन 2000 में सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की थी की ताजमहल की साइट को खोदकर इस बात के प्रमाण जुटाए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने इस अर्जी को रद्द कर दिया।
  • अर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को ताजमहल के शिव मंदिर धाम होने के कहीं भी कोई प्रमाण नहीं मिले हैं 
  • सफेद संगमरमर से बने ताजमहल के सामने ही एक काले संगमरमर से बना ताजमहल होता तो कैसा होता। यह सिर्फ एक कल्पना नहीं है बल्कि शाहजहां यमुना नदी की दूसरी तरफ काले संगमरमर से एक और ताजमहल बनाना चाहते थे और इसका ले ताजमहल में वह अपना खुद का मकबरा बनवाना चाहते थे। लेकिन इससे पहले कि वह काला ताजमहल बनवा दे उन्हीं के बेटे औरंगजेब ने उन्हें कैद खाने में डलवा दिया।  
  • मुमताज महल जिनकी याद में ताजमहल बनाया गया था उनका असली नाम अर्जुमंद बानो बेगम था। मृत्यु के समय उनकी उम्र 38 वर्ष थी और अपनी 14वी संतान को जन्म देते हुए उनकी मृत्यु हुई थी। मृत्यु के समय वह बुरहानपुर, मध्य प्रदेश में थी। मुमताज महल को बुरहानपुर में ही दफनाया गया था और बाद में ताजमहल बनवाना प्रारंभ किया गया था। उसके बाद उनके शव को बुरहानपुर से लाकर ताजमहल के बाहर एक बगीचे में दफनाया गया और 22 वर्ष बाद जब ताजमहल बनकर तैयार हो गया तब मुमताज के शव को ताजमहल के मुख्य गुंबद के नीचे दफनाया गया।
  • taj mahal movie – ताजमहल पर अब तक बहुत सी फिल्में बन चुकी हैं और बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक बहुत सी फिल्मों में ताजमहल को दिखाया गया है या उसका जिक्र हुआ है।
  • साल 1942 में फिल्म अभिनेता मोहम्मद नसीम को मुख्य किरदार में रखकर ताजमहल नाम से एक फिल्म बनाई गई थी। साल 1963 में भी ताजमहल के नाम से एक और फिल्म बनी थी।
  • इसी प्रकार वर्ष 2005 में भी ताजमहल के नाम से एक फिल्म बनी थी जिसमें मुख्य कलाकार कबीर बेदी, अरबाज खान, पूजा बत्रा आदि थे।
  • साल 2020 में नेटफ्लिक्स पर एक वेब सीरीज “taj mahal 1989” के नाम से बनाई गई थी।

 

ताजमहल की अद्भुत वास्तुकला – tajmahal architecture

 

ताजमहल की मुगलकालीन वास्तुकला अद्भुत है। इसकी वास्तु शैली फारसी तुर्की भारतीय और इस्लामी वास्तुकला का मिश्रण है। 

ताजमहल को इसकी वास्तुकला की वजह से सन 1983 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में शामिल किया गया था। साथ ही ताजमहल को मानव निर्मित कृतियों में सर्वोत्तम कृतियों में से एक बताया गया है और इसे भारत की इस्लामी कला का रत्न भी कहा गया है।

ताजमहल के मुख्य रूपांकनकर्ता उस्ताद अहमद लाहौरी को माना जाता है।

 

वास्तुकला के मुख्य घटक

 

संगमरमर से बना मकबरा

 

ताजमहल का जो मुख्य आकर्षण है वह है ताजमहल के केंद्र में स्थित मकबरा। यह मकबरा 23 फुट ऊंचे चबूतरे पर सफेद संगमरमर से बना है। मकबरे में एक वक्राकार दरवाजा है और मकबरे के ऊपर एक विशाल गुंबद बना हुआ है।

मुख्य कक्ष में मुमताज महल और शाहजहां की जो कब्रे दिखाई जाती है, वह नकली कब्रे हैं जिन्हे प्रतिरूप के तौर पर वहां बनाया गया है। असली कब्रे निचले तल पर स्थित है।

 

विशालकाय गुंबद

Taj Mahal gumbad

ताजमहल का विशाल गुंबद वास्तुकला का एक अनूठा नमूना पेश करता है। इस विशाल गुंबद की ऊंचाई लगभग 35 मीटर है और यह प्याज के आकार का नजर आता है। साथ ही इसका शिखर एक उल्टे रखे हुए कमल के समान प्रतीत होता है।

 

गुम्बद के आकार की छतरिया

 

विशाल गुंबद के चारों ओर छोटी छोटी चार छतरियां बनी हुई है, जिन पर छोटे-छोटे गुंबद बने हुए हैं जो आकार में मुख्य गुंबद के समान ही नजर आते है।

 

खूबसूरत किरीट कलश

Taj Mahal Kirit Kalash

विशाल मुख्य गुंबद के शिखर पर एक कलश बना हुआ है। जब ताजमहल को बनाया गया था तब यह कलश सोने का लगाया गया था लेकिन बाद में 1800 ई० ब्रिटिश शासन काल में इस सोने के कलश को हटाकर यहां कांसे का कलश लगा दिया गया। इस शिखर कलश में फारसी और भारतीय वास्तुकला का अनुपम मिश्रण नजर आता है। इसी प्रकार के कलश हिंदू मंदिरों पर भी पाए जाते हैं। इस कलश पर चंद्रमा बना हुआ है जो कलश की नोक के साथ मिलकर एक त्रिशूल का आकार बनाता है जो भारतीय संस्कृति में भगवान शिव का चिह्न है।

 

विशाल मीनारें

Taj Mahal minar 

ताजमहल के चारों कोनों पर चार विशाल मिनारे स्थित है और इन मीनारों में प्रत्येक की ऊंचाई लगभग 40 मीटर है। यह चारों मीनारे बाहर की ओर झुकी हुई है और इन मीनारों को ऐसा इसलिए बनाया गया है ताकि कभी अगर किसी प्रकार की प्राकृतिक आपदा हो या भूकंप आ जाए तो यह मीनारें बाहर की ओर गिरे जिससे ताजमहल के मुख्य भाग को नुकसान ना हो।

 

चारबाग

 

चारबाग ताजमहल को चारों ओर से घेरे हुए एक 300 वर्ग मीटर का बगीचा है जिसे मुगल काल में बनाया गया था। चारबाग में एक छोटा सा तालाब बना हुआ है जिसमें ताजमहल का खूबसूरत प्रतिबिंब नजर आता है। यह तालाब, मकबरे और मुख्य द्वार के बीचो बीच बना हुआ है।

चारबाग में चारों ओर पेड़ पौधे लगे हुए हैं। मकबरे से लेकर मुख्य द्वार के बीच में पानी के फव्वारे लगे हुए हैं। साथ ही यह पूरा चारबाग हरी घास की चादर से ढका हुआ है जोकि बहुत ही खूबसूरत नजर आता है।

 

ताजमहल का प्रवेश द्वार

Taj Mahal Pravesh dwar

ताजमहल का मुख्य प्रवेश द्वार लाल बलुवा पत्थरो और सफेद संगमरमर से मिलकर बनाया गया है इसमें कई और कीमती पत्थरों की चढई भी की गई है

इस प्रवेश द्वार की ऊंचाई लगभग 93 फीट है और दरवाजे के बाहरी भाग पर कुरान की कुछ आयतें भी सफेद संगमरमर पर अंकित है।

प्रवेश द्वार से जब ताजमहल को देखा जाता है तब ताजमहल बड़ा नजर आता है लेकिन जैसे-जैसे प्रवेश द्वार के अंदर आते जाते हैं ताजमहल दूर जाता हुआ प्रतीत होता है।

 

भव्य और विशाल मस्जिद एवं अतिथि गृह

 

ताजमहल के पश्चिम में एक ताज मस्जिद भी बनी हुई है जो की बहुत ही भव्य और विशाल नजर आती है। इस मस्जिद का निर्माण भी लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से ही किया गया है।

 आगरा में ताजमहल के अलावा अन्य घूमने लायक पर्यटन स्थल।

 

  • फतेहपुर सीकरी
  • आगरा का किला
  • Itmad-ud-daula का मकबरा या बेबी ताजमहल
  • अकबर का मकबरा
  • मेहताब बाग
  • चीनी का रोजा
  • अंगूरी बाग
  • ताज संग्रहालय
  • वाइल्डलाइफ एसओएस
  • आगरा की जामा मस्जिद

ताजमहल को लेकर अक्सर लोगों के पूछे जाने वाले प्रश्न

 

Q. Taj Mahal online ticket price ? – ताजमहल का टिकट कितने का है 2022?

Ans. ताजमहल में दिन में प्रवेश शुल्क :

भारतीय नागरिक – ₹50

विदेशी नागरिक – ₹1100

सार्क और बिम्सटेक देशों के नागरिक – ₹540

15 वर्ष तक के बच्चे (भारतीय और विदेशी) – निशुल्क

ताजमहल में मुख्य समाधि स्थल – ₹200

Still camera charge – free

 

रात्रि के समय ताजमहल का प्रवेश शुल्क :

भारतीय नागरिक – ₹510

विदेशी नागरिक – ₹750

3 वर्ष से 15 वर्ष की उम्रके बच्चे (भारतीय और विदेशी) – ₹500

3 साल से कम उम्र के बच्चे – निशुल्क

ऑनलाइन टिकट ( taj mahal online ticket )बुक कराने का लिंक नीचे दिया गया है – 

online ticket

 

Q. ताजमहल किस दिन बंद रहता है?

Ans. ताजमहल शुक्रवार के दिन बंद रहता है।

Q. आगरा स्टेशन से ताजमहल की दूरी?

Ans. राजा की मंडी रेलवे स्टेशन से ताजमहल की दूरी लगभग 9.5 किलोमीटर है।

आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन से ताजमहल की दूरी लगभग 4.8 किलोमीटर है।

आगरा कैंट रेलवे स्टेशन से ताजमहल की दूरी लगभग 6.7 किलोमीटर है।

Q. ताजमहल के खुलने और बंद होने का समय ? taj mahal opening time ?

Ans. ताज महल की टिकट खिड़की सूर्योदय से एक घंटा पहले खुलती है और इसे सूर्यास्त से 45 मिनट पहले बंद कर दिया जाता है।

Q. ताज महल कितना पुराना है ?

Ans. ताजमहल का निर्माण कार्य 1631 में प्रारंभ हुआ था और 1653 में ताजमहल बनकर तैयार हो गया था। 

Q. क्या ताजमहल रंग बदलता है ?

Ans. ताजमहल अपना रंग नहीं बदलता है। ताजमहल सफेद संगमरमर से बना हुआ है। सफेद संगमरमर पर सुबह के समय सूरज की रोशनी गिरती है तब ताजमहल गुलाबी रंग का नजर आता है। दोपहर के समय जब तेज धूप ताजमहल पर आती है तब ताजमहल सफेद रंग का नजर आता है और रात को जब चांद की रोशनी ताजमहल पर आती है तब ताजमहल सुनहरा और बेहद खूबसूरत नजर आता है। 

ताजमहल देखने के लिए आगरा कैसे पहुंचे

 

वायु मार्ग के द्वारा

आगरा में खेरिया अथवा आगरा हवाई अड्डा है जो कि लगभग आगरा के ताजमहल से 12 मिनट की दूरी पर स्थित है। आगरा शहर से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस हवाई अड्डे से इंडियन एयरलाइंस की उड़ाने निरंतर संचालित होती रहती है।

रेल मार्ग द्वारा

 आगरा रेल मार्ग के द्वारा देश के लगभग सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। आगरा के मुख्य रेलवे स्टेशन आगरा कैंट, राजा की मंडी और आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन है। आगरा से दिल्ली के बीच चलने वाली प्रमुख ट्रेनें, पैलेस ऑन व्हील्स, शताब्दी, राजधानी और ताज एक्सप्रेस है, जिसके द्वारा आगरा बिना किसी परेशानी के आसानी से पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग द्वारा

देश के सभी बड़े शहरों से आगरा के लिए बस सेवा उपलब्ध है। बहुत सी प्राइवेट ट्रैवल एजेंसी देश के अलग-अलग शहरों से आगरा के लिए बस सेवा प्रदान करती है। इसके अलावा सरकारी परिवहन भी देश के विभिन्न शहरों से आगरा के लिए आते हैं।

 आगरा के प्रमुख बस स्टैंड ईदगाह और आईएसबीटी है जहां से नियमित बसें चलती है

निजी साधन से

आगरा देश के लगभग सभी शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है, इसलिए आगरा में अपने निजी साधन से भी आ सकते हैं और यहां पर पार्किंग की सुविधा भी आसानी से उपलब्ध हो जाएगी।

Local transportation – स्थानीय परिवहन 

आगरा शहर में पहुंचने के बाद ताजमहल तक पहुंचने के लिए बहुत से स्थानीय परिवहन है, जिनकी सहायता से आसानी से ताजमहल तक पहुंचा जा सकता है।

स्थानीय परिवहन साधनों में टैक्सी, टेंपो, ऑटो रिक्शा, साइकिल रिक्शा, प्रीपेड टैक्सी, घोड़ा गाड़ी, बैटरी से चलने वाली बसें इत्यादि साधन उपलब्ध है। इसके अलावा घंटे के आधार पर साइकिले किराए से भी ली जा सकती हैं। 

आगरा शहर में ठहरने के लिए होटल :

 

आगरा शहर में ठहरने के लिए 350 से भी अधिक होटल मौजूद हैं, जिनकी प्राइस अलग-अलग सुविधाओं अनुसार अलग-अलग है। यहां ₹300 से लेकर ₹750000 तक की प्रतिदिन प्राइस के आधार पर होटल मिल जाएंगे।

ताजमहल का नक्शा – taj mahal map

 

 

ताजमहल के विषय में और अधिक जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें –

Taj Mahal – Wikipedia

Taj Mahal official website

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