Categories
Himachal Pradesh

Lahaul valley Himachal Pradesh | लाहौल वैली, हिमाचल का ” ठंडा रेगिस्तान “

Spread the love

Lahaul valley Himachal Pradesh लाहौल वैली हिमाचल प्रदेश

Table of Contents

(Lahaul valley) लाहौल घाटी जिसमें कई छोटी छोटी घाटियां हैं। सुंदर परिदृश्य, ऊंची और गहरी घाटियां, लटकते हुए ग्लेशियर, नदियां, मठ, मंदिर, हिंदू और बौद्ध संस्कृतियों का समागम और घुमावदार तथा रोमांचक सड़कों का मिश्रण है लाहौल घाटी (Lahaul valley)लाहौल और स्पीति लाहौल-स्पीति जिले के दो उपमंडल हैं। हालांकि स्पीति घाटी का अधिकार क्षेत्र ग्राम्फू से परे कोकसर से शुरू होता है। लेकिन इसका पहला गांव लोसार है जो कुंजुम दर्रे के दूसरी तरफ है। लाहौल में, केलांग जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है।
भौगोलिक क्षेत्रफल की दृष्टि से लाहौल स्पीति हिमाचल का सबसे बड़ा जिला है और इसे “मिनी लद्दाख” के रूप में भी जाना जाता है।
 यह स्थान अधिक ऊंचाई वाली बंजर भूमि और अत्यधिक ठंडे तापमान के कारण हिमाचल के “ठंडे रेगिस्तान” के रूप में भी जाना जाता है। हिमाचल का यह जिला सबसे अधिक ठंडा है, जहां कई स्थानों पर तापमान सर्दियों के मौसम में शून्य से 25 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है।

Places to visit in lahaul valley लाहौल घाटी में घूमने के स्थान

Chandrabhaga  Sangam Lahaul Valley चंद्रभागा संगम लाहौल वैली

टांडी गांव जिला मुख्यालय के नाम के पास स्थित है और यहां दो शक्तिशाली नदियां भव्य रुप से मिलती है और पवित्र संगम बनाती है। ये नदियां है चंद्रा और भागा।
चंद्रा, भागा और युमान नदियां बारालाचा मासिफ से निकलती है, जोकि हिमालय क्षेत्र में ऊंची चोटियों और दर्रे के बीच बेहद रमणीय प्रतीत होती हैं।
इस नदी के लिए एक और नाम काफी महत्वपूर्ण है जो  “तांग -ती” है। एक बौद्ध नाम जहां तांग का अर्थ है, “स्वर्ग” और ती का अर्थ है, “पानी” । लाहौल की भूमि बहुत ही पवित्र और अनोखी है जहां कैलाश पर्वत जैसे पवित्र शिखर की हिंदू और बौद्ध दोनों समान रूप से पूजा करते हैं। लाहौल में एक ही छत के नीचे शिव और बुद्ध की पूजा करने की यह अद्भुत परंपरा है, जिसे कैलाश के तत्वों के रूप में जाना जाता है।
चंद्रभागा संगम काशी सहित भारत के 8 महान स्थानों में से एक है इतिहासकार मानते हैं कि यही वह स्थान है जहां द्रोपदी ने अपने पतियों के साथ स्वर्ग जाते समय अंतिम सांस ली थी चंद्रभागा के संगम के पास स्थानीय लोगों ने यहां उनका अंतिम संस्कार किया।
चंद्रभागा संगम पर हर वर्ष संगम पर्व मनाया जाता है। जहां लगभग 100 गांव हिस्सा लेते हैं और हर घर में भव्य दावत के आयोजन के लिए चावल, घी, चीनी और दाल का दान किया जाता है । 
 ऐसा माना जाता है कि लाहौल के कलाकार सर्वश्रेष्ठ बांसुरी वादक है, जिनके पास जन्म से लेकर मृत्यु तक, जीवन के हर चरण के लिए राग है।
 संगम पर्व के इस दिन स्थानीय कलाकार विभिन्न रागों और नृत्यों का प्रदर्शन करते हैं जो न केवल स्थानीय लोगों का मनोरंजन करते हैं बल्कि घाटी में पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं।

Sissu waterfall Lahaul valley सिस्सू झरना लाहौल वैली

इस झरने को खगलिंग भी कहा जाता है। हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में यह चंद्र नदी के तट पर स्थित है।
 यह सीसु जलप्रपात लेह से 15 से 20 मिनट की दूरी पर है। यह झरना अपनी हरियाली के लिए जाना जाता है और यह ग्राम्फु से 25 किलोमीटर की दूरी पर है।
सिसु झरना यहां पर आने वाले सभी आगंतुकों का के लिए आकर्षण का केंद्र होता है यह प्रकृति की उत्कृष्ट रचनाओं में से एक है जो हमारी आंखों को शीतल और संतुष्ट करते हैं
जब आप लेह और लद्दाख के पहाड़ों की ओर बढ़ रहे होते हैं तो शिशु का फाल्स लेह मनाली हाईवे पर पड़ता है समृद्धि हरी भरी घाटी से आगे बढ़ते हुए और इस झरने की भव्यता की सराहना करें
यह झरना समुद्र तल से 3120 मीटर यानी कि लगभग 10235 फीट की ऊंचाई पर है।

Rohtang Pass Lahaul valley रोहतांग दर्रा लाहौल वैली

रोहतांग दर्रा 13050 फीट की ऊंचाई पर है। और यह कुल्लू को लाहौल घाटी से अलग करता है।
 यहां पर बर्फीले तूफान आते रहते हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में बियाना कहा जाता है। तथा बार-बार हिमस्खलन के कारण यह दर्रा और भी अधिक खतरनाक हो जाता है।
 गर्मियों में दर्रे के शिखर पर हरे-भरे घास के मैदान दिखाई पड़ते हैं। साथ ही अल्पाइन के फूल इस स्थान को और भी खूबसूरत बना देते हैं। भिन्न-भिन्न रंगों की तितलियां लोगों का ध्यान आकर्षित करती है।
 इस दर्रे के बाई और छोटी सर कुंड झील है।

Rohtang Pass koksar  Lahaul valley   रोहतांग पास कोकसर लाहौल वैली

कोकसर लाहौल का प्रवेश द्वार है और हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले के सबसे ठंडे गांव में से एक है। यह गांव 3140 मीटर की ऊंचाई पर और चंद्रा नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है।
 पूरी लाहौल और स्पीति घाटी पश्चिमी हिमालय की चोटियों और पीर पंजाल पर्वत श्रंखला के बीच स्थित है। बाहरी दुनिया से इसकी दूरी ने इसे तिब्बत और तिब्बती संस्कृति की परंपराओं को बनाए रखने में मदद की।
 रोहतांग दर्रे से केलांग लेह मार्ग की ओर सिर्फ 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कोकसर, लेह लद्दाख की ओर जाने वालों के लिए लोकप्रिय यात्रा गंतव्य है।
 यह एक शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण जगह है जो बाहरी दुनिया से बिल्कुल अलग है।
पास की पहाड़ी के ठीक ऊपर स्थित मठ “कोकसर थोलिंग गुंपा” में आप कुछ समय एकांत में बिता सकते हैं और आध्यात्मिक शांति आनंद ले सकते हैं।

Shinkula pass ( singola pass) Lahaul valley शिंकुला पास लाहौल वैली

शिंकूला, भारत में लद्दाख और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित एक पहाड़ी दर्रा रहा है। दर्रे से 20 मीटर नीचे एक झील या पूल है। 
यह दर्रा जांस्कर और लाहौल को जोड़ने वाली एक पगडंडी पर स्थित है जिसका उपयोग अक्सर स्थानीय लोग और ट्रैकर्स करते हैं।
 यहां पर किसी प्रकार का कोई ग्लेशियर ट्रैक या खड़ी चढ़ाई नहीं है।
 पूरे साल इस दर्रे पर बर्फ रहती है, हालांकि गर्मियों में केवल बर्फ के छोटे से हिस्से को पार करना पड़ता है।
 इस दर्रे की ऊंचाई लगभग 4900 से 5100 मीटर तक है। जांस्कर की ओर का निकटतम बसा हुआ गांव कुर्गियाख है और लाहौल की ओर चिक्का है।

Gondhla fort Lahaul valley गोंधला किला लाहौल वैली

 गोंधला के ठाकुर का घर जिसे गोंधला किला कहा जाता है। यह किला बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है।
 यह लगभग 1700 ईस्वी में कुल्लू के राजा मानसिंह के द्वारा बनवाया गया था, जिसका प्रभाव लिंगती मैदानों तक फैला हुआ था। 
यह महल पश्चिमी हिमालय की स्वदेशी लकड़ी की बंधुआ पत्थर शैली का एक अनुपम उदाहरण है। जिसमें पत्थर और लकड़ी के बीम के वैकल्पिक सामान शामिल हैं। और गीली मिट्टी के साथ सीमेंट का उपयोग किया गया है।
 इस सात मंजिला ऊंचे भवन के ऊपर एक लकड़ी का बरामदा बना हुआ है, जो बेहद ही खूबसूरत नजर आता है।
 यह स्विस शैली में बनी हुई इमारत है। इमारत में सीढ़ियां आंशिक रूप से नोकदार लकड़ी के लट्ठे की बनी हुई है।
 इमारत में कई अपार्टमेंट हैं, जो आराम से 100 से अधिक लोगों को समायोजित कर सकते है।
 पांचवी मंजिल विशेष रूप से ठाकुर के लिए थी। इसमें व्यक्तिगत प्रार्थना कक्ष और एक बरामदा शामिल था, जहां से ठाकुर जनता की बातें सुनते थे और बाद में अपने निर्णय सुनाते थे।
  मुख्य देवता के रूप में गणेश जी को प्रार्थना कक्ष के अग्रभाग पर उकेरा गया है। 
प्रार्थना कक्षाओं में से एक में बाहरी कमरे को जोड़ने वाली खिड़की लकड़ी की नक्काशी का एक उत्कृष्ट काम है। माना जाता है कि कुल्लू के राजा मानसिंह 1720 में किले की छठी मंजिल पर रुके थे, जब वह उदयपुर में त्रिलोकीनाथ मंदिर जा रहे थे।

Neelkanth Mahadev lake Lahaul valley नीलकंठ महादेव झील लाहौल वैली

नीलकंठ महादेव झील ट्रैक हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिलों के पास है।
 नीलकंठ महादेव ट्रेक का सबसे अच्छा समय मध्य जून से मध्य सितंबर के बीच में होता है।
 यहां पर शिविर के लिए निकटतम गांव थिरोट है।
 नीलकंठ महादेव ट्रैक की लंबाई 15 किलोमीटर के लगभग है।
 नीलकंठ महादेव झील ट्रैकिंग से शानदार और अदभुत नजारे दिखाई पड़ते है।
 नीलकंठ झील हिमाचल प्रदेश के लाहौल की टप्पन घाटी में स्थित है। झील औसत समुद्र तल से लगभग 4200 मीटर या 13777 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
 नीलकंठ हिमालय श्रंखला की एक ऊंची चोटी है और भगवान शिव को समर्पित है। इसके तल पर एक छोटी पहाड़ी झील है, जिसे नीलकंठ झील के नाम से जाना जाता है।
 इस सरोवर के पास भगवान शिव का एक छोटा सा मंदिर है। झील में पवित्र स्नान करने के लिए देश-विदेश से कई श्रद्धालु यहां पर आते हैं।
 नीलकंठ महादेव ट्रेक एक बहुत ही दिलचस्प ट्रेक है, जिसमें विभिन्न भूभाग देखने को मिलते हैं।
 ट्रैक नैघर से शुरू होता है, जो कि एक बहुत ही कम आबादी वाला छोटा सा गांव है और पहाड़ों से चंद्रभागा नदी की तरफ बहने वाली हिमनद जलधारा के दाहिने किनारे पर स्थित है।
इस यात्रा में हमें सुंदर छोटे घास के मैदान नजर आते हैं। यहां पर इतनी ऊंचाई पर रहने वाले लोगों से हमारी मुलाकात होती है। चरवाहे भेड़ों के झुंड के साथ नजर आते हैं। तथा ठंडे ठंडे पानी के साथ बहती नदियों की जल धाराओं को पार करना पड़ता है और आखिर में यह कठिन पैदल यात्रा एक खूबसूरत प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण नजारों को देखते हुए समाप्त होती हैं।

Ghepan lake Lahaul valley घेपन झील लाहौल वैली

घेपन घाट हिमाचल प्रदेश के लाहौल क्षेत्र में स्थित है।
घेपन झील के लिए पैदल यात्रा सीसु के छोटे से गांव से शुरू होती है जो मनाली लेह मार्ग पर स्थित है।
घेपन लाहौल घाटी के सबसे पूजनीय देवता है। इन्हें राजा घेपन कहा जाता है।
घेपन झील का रंग अविश्वसनीय रूप से नीला है और यह नीला रंग है अपरिवर्तित है। यह झील हर समय नीले ही रंग में दिखाई देती है।
घेपन घाट एक शांत ग्लेशियर झील है जो लगभग 4140 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

Deepak Tal lahaul Lahaul valley दीपक ताल लाहौल वैली

दीपक ताल मनाली लेह राजमार्ग पर स्थित है। यह एक छोटी सी झील है जो जिस्पा से 20 किलोमीटर और केलांग से 43 किलोमीटर की दूरी पर है।
यह झील 3750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और सर्दियों में यह झील पूरी तरह से जम जाती है।
यह एक बहुत ही खूबसूरत स्थान है, जहां आप यात्रा के दौरान कुछ देर आराम कर सकते हैं। झील के पास स्थित ढाबों पर आप खाना खा सकते हैं। झील में आप बोटिंग का मजा भी ले सकते हैं और इस शांत झील के किनारे बैठ कर खुद को अच्छा महसूस करा सकते हैं।

Suraj tal lake Lahaul valley सूरज ताल झील लाहौल वैली

 

सूरज ताल झील 800 मीटर लंबी झील है जो लाहौल और स्पीति घाटी में 4890 मीटर ऊंचे बारा लाचा ला दर्रे के ठीक नीचे स्थित है।
 यह भारत की तीसरी सबसे ऊंची और दुनिया की 21वीं सबसे ऊंची झील है।
लाहौल स्पीति घाटी, भारतीय और विदेशी पर्यटकों के लिए रोड ट्रिप, ट्रैकिंग और मोटरसाइकिलिंग का एक बेहतरीन स्थान है।
 यह मनाली से लेह तक NH-21 पर सूरज ताल झील और बारा लाचा ला दर्रे को कवर करता है।
दीपक ताल झील से होते हुए भागा नदी निकलती है जो आगे जाकर चंद्रा नदी के संगम स्थल तांडी तक बहती है।
सूरज ताल झील लाहौल स्पीति जिले के जिला मुख्यालय केलांग से 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
 यहां राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 21 के द्वारा पहुंचा जा सकता है। जिसे लेह मनाली राजमार्ग के रूप में भी जाना जाता है। सूरज ताल से लगती हुई सड़क जो बारा लाचा ला दर्रे से सिर्फ 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नवंबर से अप्रैल तक सर्दियों के महीनों के दौरान यह स्थान पूरी तरह से बर्फ से ढका रहता है।

Baralacha la Pass Lahaul valley बारालाचा ला दर्रा लाहौल वैली

बारालाचा ला दर्रा 4850 मीटर ऊंचा दर्रा है, जो जांस्कर रेंज में स्थित है।
 लेह मनाली राजमार्ग इस दर्रे से होकर गुजरता है।
मानसून के दौरान बर्फ पिघलने के साथ ही बारालाचा ला दर्रे की खूबसूरती और भी अधिक बढ़ जाती है। 
चंद्रा और भागा नदियां बारालाचा दर्रे के पास से ही निकलती है।
 भागा नदी सूर्य ताल झील से निकलती है, जो मनाली की ओर दर्रे से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। और चंद्रा नदी इस क्षेत्र के ग्लेशियर से निकलती है।
 चिनाब नदी का मूल नाम “चंद्रभागा” चंद्र और भागा नदियों के मिलन का प्रतिनिधित्व करता है।

Sarchu Lahaul valley सरचू लाहौल वैली

सरचू, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बीच की सीमा पर, लेह मनाली राजमार्ग पर स्थित है।
 यह दक्षिण में बारालाचा ला और उत्तर में लांचूलुंग ला के बीच 4290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
इस स्थान पर जून से सितंबर के बीच जाया जा सकता है। क्योंकि उस समय बर्फ पिघलती है और लेह मनाली राजमार्ग यातायात के लिए खुल जाता है।
लद्दाख के जांस्कर ट्रैक के लिए सरचू शुरुआती बिंदु है।
 इस ट्रैक के रास्ते में बर्फ से ढकी चोटियों के खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं।
 इसके अलावा ट्रैक में नदियां, घाटियां आदि रोमांचक स्थान देखने को मिलते हैं जो कि पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

Miyar Valley Lahaul valley मियार घाटी लाहौल वैली

हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति जिले के उत्तर पश्चिम में मियार घाटी स्थित है।
 इसे फूलों की घाटी के नाम से भी जाना जाता है। यहां सड़क मार्ग से पहुंचना आसान है।
 गर्मियों के दौरान यहां पर मटर, आलू, जो,  की खेती की जाती है।
 फूलों से खिली इस शानदार घाटी को देखने के लिए जुलाई और अगस्त का समय बेहतर है।
 यहां पर दुर्लभ blue poppy काफी प्रसिद्ध है

Udaipur Lahaul valley उदयपुर लाहौल वैली 

इस गांव को पहले मार्गुल या मरकुल के नाम से जाना जाता था।
 1695 के आसपास इसका नाम बदलकर उदयपुर कर दिया गया, जब चंबा के राजा उदय सिंह ने इसे चंबा लाहौल में एक जिला केंद्र का दर्जा दिया। यह केलांग से 53 किलोमीटर की दूरी पर है।
यह स्थान पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए एक प्रसिद्ध स्थान है क्योंकि यहां पर त्रिलोकीनाथ और मारकुला देवी के प्रसिद्ध मंदिर है, जो दर्शनार्थियों को अपनी और आकर्षित करते हैं।
 त्रिलोकी नाथ मंदिर कश्मीरी कन्नौज शैली में बना हुआ मंदिर है। यह मंदिर हिंदू और बौद्ध दोनों तीर्थ यात्रियों को आकर्षित करता है। परिषद केंद्र में भगवान शिव के नंदी बैल की मूर्ति को देखा जा सकता है।

lahaul map

हमारे अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए क्लिक करें

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें

Leave a Reply

Your email address will not be published.